दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें सरकार से उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराने की मांग की गई है।
याचिका वकील और सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सैनी ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन लगभग 8.5 किलोग्राम घट चुका है। उनका ब्लड प्रेशर 107/70 mmHg और ब्लड शुगर 67 mg/dL तक पहुंच गया है, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा बताया गया है।
आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, वांगचुक का आज 18वां दिन भी अनशन जारी है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें खड़े होने या बैठने में भी चक्कर आने लगे हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है और स्थिति गंभीर होती जा रही है।
सोनम वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। यह प्रदर्शन नीट-यूजी पेपर लीक मामले के विरोध में शुरू हुआ था। हालांकि, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।