
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद कई वैश्विक नेताओं की तबीयत बिगड़ने को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को विदेश मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक इकाई ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए लोगों से बिना पुष्टि वाली सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा नहीं करने और उन्हें आगे साझा करने से बचने की अपील की है।
विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक इकाई ने 17 सितंबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट जारी कर ऐसे दावों को लेकर चेतावनी दी। मंत्रालय ने इसे ‘फेक अलर्ट’ बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक पोस्ट से सावधान रहने की जरूरत है।
शी जिनपिंग की तबीयत को लेकर फैली अफवाह
ब्रिक्स सम्मेलन के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेहत को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल हुए। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग बेहोश हो गए थे और उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्या हुई थी। हालांकि, इन दावों की कोई विश्वसनीय आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक इकाई ने नेताओं की सामूहिक रूप से तबीयत खराब होने वाले दावों को खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक बताया है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी अटकलों को तथ्य के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।
रामाफोसा की तबीयत खराब होने की अलग से पुष्टि
हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा की तबीयत को लेकर एक आधिकारिक जानकारी जरूर सामने आई है। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि भारत से लौटने के बाद रामाफोसा ने खराब स्वास्थ्य के कारण सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाई है। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने और स्वस्थ होने की सलाह दी है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से उनकी बीमारी की प्रकृति या इसके कारणों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। साथ ही, उनकी तबीयत खराब होने को ब्रिक्स सम्मेलन या भारत यात्रा से जोड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
12 और 13 सितंबर को हुआ था ब्रिक्स सम्मेलन
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। भारत की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन में ब्रिक्स के विस्तारित समूह के नेताओं और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के बाद नई दिल्ली घोषणा भी जारी की गई।
सम्मेलन के बाद सोशल मीडिया पर कुछ नेताओं की सेहत को लेकर अलग-अलग दावे तेजी से फैलने लगे। विदेश मंत्रालय के फैक्ट चेक के बाद इन दावों को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संवेदनशील या बड़ी खबर को साझा करने से पहले उसकी आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि जरूर करें।












