
संसद के उच्च सदन राज्यसभा में मंगलवार को OBC आरक्षण को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। बहस उस वक्त तेज हो गई जब के. लक्ष्मण ने कुछ राज्यों में मुसलमानों को OBC कोटे का लाभ दिए जाने पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन होना चाहिए, लेकिन कुछ राज्य सरकारें “धर्म के आधार” पर इसे लागू कर रही हैं। इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
विपक्ष का विरोध, वॉकआउट
विपक्षी सदस्यों ने इसे भ्रामक और विभाजनकारी बताते हुए तुरंत प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि भारत में आरक्षण किसी धर्म को नहीं, बल्कि पिछड़े वर्गों को दिया जाता है—चाहे वे किसी भी धर्म से हों। बढ़ते हंगामे के बीच विपक्ष ने सदन से वॉकआउट भी किया।
असल मुद्दा क्या है?
भारत में OBC आरक्षण उन समुदायों को दिया जाता है जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं। कुछ मुस्लिम समुदाय भी इसी आधार पर OBC सूची में शामिल हैं। इसी बात को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है—जहां एक पक्ष इसे “नीति का गलत इस्तेमाल” बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे संवैधानिक व्यवस्था के तहत सही ठहरा रहा है।
राज्यसभा में उठा यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है। आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है, खासकर चुनावी माहौल के बीच।













