
कर्नाटक सरकार ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घोषणा की है कि राज्य में अब 16 साल से कम उम्र के बच्चे WhatsApp, Instagram और Facebook जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, साइबर बुलिंग और आपत्तिजनक कंटेंट से बचाने के लिए उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में सोशल मीडिया की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। कई मामलों में पढ़ाई में ध्यान की कमी, तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। सरकार का मानना है कि इस प्रतिबंध से बच्चे पढ़ाई, खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
सरकार इस फैसले को लागू करने के लिए तकनीकी और कानूनी व्यवस्था तैयार कर रही है। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को प्लेटफॉर्म पर सख्त एज वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करना होगा, ताकि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट बनाए ही न जा सकें। यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो संबंधित कंपनियों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही सरकार ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट उपयोग पर निगरानी रखें।
इस फैसले के बाद राज्य में बहस भी शुरू हो गई है। कई बाल मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है और कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक विकास को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं कुछ तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि VPN और फर्जी अकाउंट के दौर में इस नियम को पूरी तरह लागू करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विपक्षी दलों ने भी फैसले के उद्देश्य का समर्थन किया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं।













