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Thursday, January 22, 2026
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ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिलाने की कोशिशों पर अमेरिका में घमासान, सांसद के बयान से बढ़ा विवाद

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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिलाने की कोशिशों को लेकर अमेरिका के भीतर ही तीखा विरोध शुरू हो गया है। ट्रंप समर्थकों द्वारा नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को लिखे गए पत्र के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। पत्र में ट्रंप को शांति पुरस्कार का सबसे योग्य उम्मीदवार बताया गया था, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वरिष्ठ अमेरिकी सांसद ने बेहद विवादित बयान दे दिया।

सांसद का तीखा बयान, रिपब्लिकन नाराज़

अमेरिकी सांसद ने सार्वजनिक रूप से कहा कि डोनाल्ड ट्रंप मानसिक रूप से बीमार हैं और उन्हें किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मान के बजाय उपचार की आवश्यकता है। सांसद का कहना था कि ट्रंप की नीतियां और पुरस्कार की मांग उनके अहंकार को दर्शाती हैं, न कि विश्व शांति के प्रति कोई ठोस योगदान। इस बयान के बाद रिपब्लिकन पार्टी में नाराज़गी फैल गई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी चर्चा होने लगी।

पत्र से शुरू हुआ पूरा विवाद

यह विवाद उस समय भड़का जब ट्रंप के करीबी सहयोगियों और समर्थक सांसदों ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ट्रंप के पक्ष में पैरवी की। पत्र में दावा किया गया कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल में अब्राहम एकॉर्ड के जरिए मध्य पूर्व में ऐतिहासिक शांति प्रयास किए, जिसके लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। हालांकि नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने साफ किया कि सरकार का नोबेल चयन प्रक्रिया में कोई दखल नहीं होता।

डेमोक्रेट्स का आरोप, दबाव की राजनीति

डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस पत्र को नोबेल समिति पर दबाव बनाने की कोशिश बताया। उनका कहना है कि पुरस्कार के लिए इस तरह की लॉबिंग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सांसद ने यह भी कहा कि जो नेता अपने ही देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाता रहा हो, वह शांति पुरस्कार का हकदार नहीं हो सकता।

रिपब्लिकन खेमे की पलटवार

विवादित बयान के बाद रिपब्लिकन नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि यह बयान घृणित और अपमानजनक है। ट्रंप समर्थकों ने दलील दी कि वे ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे जिन्होंने अपने कार्यकाल में कोई नया युद्ध शुरू नहीं किया, जिसे वे बड़ी उपलब्धि मानते हैं।

नोबेल पुरस्कार बना अमेरिकी राजनीति का मुद्दा

नोबेल शांति पुरस्कार, जो कभी वैश्विक शांति और कूटनीति का प्रतीक माना जाता था, अब अमेरिकी घरेलू राजनीति के केंद्र में आ गया है। ट्रंप को लेकर चल रही यह बहस साफ तौर पर दिखाती है कि उनका नाम जितना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित है, उतना ही वह अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण का कारण भी बना हुआ है। अब सभी की नजरें नोबेल समिति पर टिकी हैं कि वह इस राजनीतिक शोर-शराबे के बीच क्या फैसला लेती है।