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Friday, January 30, 2026
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Home news Politics अमेरिका-कनाडा में लगेगी भारत की कोवाक्सिन:कोवैक्सीन को मिली WHO की स्वीकृति.

अमेरिका-कनाडा में लगेगी भारत की कोवाक्सिन:कोवैक्सीन को मिली WHO की स्वीकृति.

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भारत बायोटेक (Bharat Biotech) के यूएस पॉर्टनर ओक्यूजेन (Ocugen) ने अमेरिका में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कोरोना ‘कोवैक्सीन’ (Covaxin) के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अनुमति मांगी है। शुक्रवार को ओक्यूजेन ने बताया कि दो साल से 18 साल के बच्चों के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) से अनुमति मांगी है। बता दें कि कोवैक्सीन का निर्माण भारत में किया गया है। 

“भारत बायोटेक के कोविड –19 (Corona Virus) टीकों के लिए क्लीनिकल प्रमुख डॉ रैचेस एला ने ट्वीट कर कहा कि हमें अपने साझेदार ओक्यूजेन के माध्यम से यूएस-एफडीए को अपनी ईयूए फाइलिंग की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।

भारत बायोटेक ने बताया कि एफडीआई को आवेदन भेजने से पहले भारत बायोटेक ने अपना दूसरा चरण का ट्रायल पूरा किया। यह ट्रायल दो से 18 साल के 526 बच्चों के ऊपर किया गया और इसी ट्रायल के नतीजों को एफडीआई के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।  यह ट्रायल मई से जुलाई 2021 के बीच पूरा किया गया है। इसमें दो से 18 वर्ष तक के बच्चों के ऊपर टीके का परीक्षण किया गया और वैक्सीन की प्रभाविकता की जांच की गई। यह जांच तीन आयु वर्ग के समूहों के बीच की गई। इसमें बच्चों को 2-6 वर्ष, 6-12 वर्ष और 12 से 18 वर्ष के आयु वर्ग में बांट दिया गया और 28 दिन के अंतराल में इन बच्चों को वैक्सीन की दोनों खुराकें दी गईं। कंपनी के मुताबिक बच्चों पर भी उतनी ही प्रभावशाली मिली है, जितना कि 18 वर्ष अधिक उम्र वाले लोगों पर मिली है।

“बुधवार को कोवैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आपातकालीन स्वीकृति मिली है। वहीं दुनियाभर के 17 देशों में इस वैक्सीन के इस्तेमाल की पहले ही अनुमति मिल चुकी है और भारत में ये वैक्सीन लाखों लोगों को लगाई जा चुकी है।”

कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी देने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि भारत बायोटेक के टीके को आपात उपयोग के लिए मंजूरी देने से टीकों की उपलब्धता बढ़ी है। जो कोरोना महामारी को समाप्त करने के लिए हमारे पास सबसे प्रभावी चिकित्सा साधन है।

आपको बता दें कि कोवैक्सीन का निर्माम भारत बायोटेक और ICMR ने मिलकर किया है। ये वैक्सीन पूरी तरह से भारत में निर्मित है। क्लीनिकल ट्रायल में ये वैक्सीन करीब 78 फीसदी प्रभावशाली पाई गई है।