क्यों है चित्तौड़गढ़ किला सबसे खास, क्या किले के रहस्य महाराणा प्रताप से जुड़ें हैं!

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चित्तौरगढ़ किला भारत का सबसे बड़ा किला है। बेरच नदी के किनारे बना ये किला 700 से ज्यादा एकड़ जगह में मौजूद है और इस किले का इतिहास स्वयं महाराज महाराणा प्रताच सिंह जी से जुड़ा है। इसे Water Fort भी कहा जाता है, किले में 84 जल Source थे, जो 50 हजार सैनिकों की 4 साल तक पानी की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम थे। किले में सबसे खास आकर्षण हैं; यहां के दो Ancient Pillars, जिन्हें कीर्ति स्तंभ और विजय स्तंभ कहा जाता है। ये स्तंभकिले राजपूत वंश के गौरवशाली इतिहास को दर्शाते हैं।

चित्तौरगढ़ किले में सात प्रवेश द्वार हैं

चितौड़गढ़ किले में 4 महल परिसर, 19 मुख्य मंदिर, 4 स्मारक और 22 कार्यात्मक जल निकाय शामिल हैं। इस किले में 7 प्रवेश द्वार हैं: राम पोल, लक्ष्मण पोल, पडल पोल, गणेश पोल, जोरला पोल, भैरों पोल और हनुमान पोल यानी आपको इस किले में अंदर जाने के लिए इन सात प्रवेश द्वारों से होकर जाना होगा और फिर सूर्य पोल को भी पार करना होगा जो कि मुख्य द्वार है।
किले का सबसे खूबसूरत हिस्सा है ‘पद्मिनी महल’
किले का एक और खूबसूरत हिस्सा पद्मिनी महल है। ये महल किला परिसर के बीच एक छोटे सरोवर के निकट स्थित बहुत ही खूबसूरत है। एक अन्य ऐतिहासिक मंदिर जो कि भगवान सूर्य को समर्पित है इसी महल के नजदीक है। पद्मिनी महल का जनाना महल शीशों से निर्मितकक्षों से भरा हुआ है जो काफी अदभुत है।

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