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Thursday, January 15, 2026
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आज ही के दिन क्यों मनाया जाता है मजदूर दिवस, भारत पहली बार कब मनाया गया जानिए

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हर साल 1 मई को ‘मजदूर दिवस’ या ‘अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह दिन उन लाखों मेहनतकश हाथों को समर्पित होता है जो ईंट-पत्थर से लेकर मशीनों और तकनीक के साथ दिन-रात मेहनत कर देश की तरक्की में योगदान देते हैं। ‘मजदूर दिवस’ केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि एक प्रतीक है उस संघर्ष, समर्पण और न्याय की मांग का, जो श्रमिकों ने दशकों पहले किया था।

‘हेमार्केट हत्याकांड’ से मिली दिशा

1 मई 1886, अमेरिका के शिकागो शहर में हजारों मजदूरों ने अपने काम की परिस्थितियों और घंटों को लेकर बड़ा आंदोलन किया था। उस समय मजदूरों से 12 से 16 घंटे तक काम लिया जाता था, लेकिन ना वेतन पर्याप्त था, न सुविधाएं। मजदूरों ने 8 घंटे काम के अधिकार की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, लेकिन ये आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक हो गया। इस दौरान हुए ‘हेमार्केट हत्याकांड’ में कई मजदूरों की जान चली गई।

इसी ऐतिहासिक आंदोलन की याद में 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन ने 1 मई को ‘अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ के रूप में घोषित किया, जो आज भी पूरी दुनिया में मनाया जाता है।

भारत में पहली बार 1923 में मनाया गया मजदूर दिवस

भारत में पहली बार ‘मजदूर दिवस’ 1923 में चेन्नई में मनाया गया था। इस आयोजन की पहल लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने की थी।
तब से लेकर आज तक भारत में मजदूर दिवस एक प्रतीक बन गया है उन अधिकारों और कानूनों का, जो श्रमिकों को समानता, सम्मान और सुरक्षा प्रदान करते हैं।

मजदूर दिवस का उद्देश्य और महत्व

यह दिन श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का कार्य करता है।

मजदूरों को उनके योगदान के लिए सम्मान देने का एक अवसर है।

कई जगहों पर रैलियां, प्रदर्शन, संगोष्ठियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

यह दिन सरकार, उद्योग और समाज को यह याद दिलाता है कि देश की नींव मजदूरों की मेहनत पर खड़ी है।

मोदी सरकार की श्रमिक कल्याण योजनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने असंगठित और संगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य है सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता।

ई-श्रम पोर्टल

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार कर उन्हें सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने की पहल।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना

60 वर्ष की उम्र के बाद श्रमिकों को ₹3000 की मासिक पेंशन देने की योजना।

अटल पेंशन योजना

60 की उम्र के बाद ₹1000 से ₹5000 तक मासिक पेंशन का प्रावधान।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)

कम प्रीमियम में आकस्मिक मृत्यु और विकलांगता के लिए बीमा कवर।

मजदूर दिवस पर यह याद रखना ज़रूरी है कि हमारे घरों की ईंट से लेकर देश की ऊँचाइयों तक, हर निर्माण में किसी न किसी मेहनतकश का पसीना शामिल है।
उनकी मेहनत का सम्मान करना सिर्फ एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है।