
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी साफ दिखने लगा है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला तो हालात और खराब हो सकते हैं।
खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुताबिक, मार्च में वैश्विक खाद्य कीमतें पिछले साल सितंबर के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। यह लगातार दूसरा महीना है जब फूड प्राइस में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो ग्लोबल बाजार पर बढ़ते दबाव का संकेत है।
40 दिन में नहीं थमा युद्ध तो बढ़ेगा संकट
FAO ने साफ कहा है कि अगर यह युद्ध अगले 40 दिनों के भीतर नहीं थमा, तो ऊर्जा के साथ-साथ खाद्य पदार्थों की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं। FAO का फूड प्राइस इंडेक्स, जो अनाज, मीट, डेयरी, वेजिटेबल ऑयल और चीनी जैसी चीजों की कीमतों को ट्रैक करता है, फरवरी के मुकाबले 2.4% बढ़कर मार्च में 128.5 पॉइंट्स पर पहुंच गया है।
चीनी की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
FAO के चीफ इकोनॉमिस्ट मैक्सिमो टोरेरो के अनुसार, सबसे ज्यादा असर चीनी पर पड़ा है। चीनी की कीमतों में करीब 7.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक ब्राजील अब चीनी की बजाय इथेनॉल उत्पादन पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जिससे ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हो रही है।
मीट और चावल भी हुए महंगे
मीट की कीमतों में करीब 1% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं खाड़ी देशों में चावल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, क्योंकि युद्ध के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका सीधा असर आम लोगों की थाली और घरेलू बजट पर पड़ेगा।













