
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर टेलीकॉम सेक्टर के लिए महज़ टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं, बल्कि पूरी इकोनॉमी और बिज़नेस मॉडल का रीसेट है। यह बात मैथ्यू ओमेन, ग्रुप सीईओ, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC) बार्सिलोना में कही। उन्होंने कहा कि दुनिया अब “मिनट्स और बाइट्स” की इकोनॉमी से आगे बढ़कर “टोकन्स और इंटेलिजेंस” की नई व्यवस्था में प्रवेश कर रही है।
ओमेन के मुताबिक इंडस्ट्रियल एरा उत्पादन पर आधारित था, इंटरनेट एरा ने कनेक्टिविटी और क्लाउड को जन्म दिया, लेकिन AI एरा आर्थिक समीकरणों को पूरी तरह बदल देगा। “यह अपग्रेड साइकिल नहीं है, यह एक कंप्लीट रीसेट है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर AI में हो रहा ट्रिलियन डॉलर निवेश इस बदलाव की गंभीरता को दर्शाता है।
कंपनी की रणनीति पर बात करते हुए ओमेन ने कहा कि जियो खुद को केवल नेटवर्क प्रोवाइडर के रूप में नहीं, बल्कि ‘इंटेलिजेंस ग्रिड’ के निर्माता के तौर पर देखता है। उनके अनुसार, टेलीकॉम की करेंसी पहले वॉयस मिनट्स थी, फिर डेटा बाइट्स में बदली और अब यह AI टोकन्स में परिवर्तित हो रही है। “हम सिर्फ सबसे बड़ा टोकन पाइप नहीं बनना चाहते, बल्कि सबसे बड़ा टोकन जेनरेटर बनना चाहते हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने समझाया कि मिनट्स, बाइट्स और टोकन्स के जरिए टेलीकॉम इंडस्ट्री के विकास को समझा जा सकता है। पहले राजस्व का आधार वॉयस कॉलिंग थी, जिसे मिनट्स में गिना जाता था। बाद में डेटा आया, जो बाइट्स में मापा जाने लगा। भविष्य में AI टोकन आधारित सेवाएं—जैसे मॉडल इंफरेंस, ऑटोमेटेड डिसीजन और मशीन-टू-मशीन इंटरैक्शन—कमाई का नया आधार बनेंगी।
ओमेन ने याद दिलाया कि जियो ने भारत में वॉयस को मुफ्त किया और डेटा की कीमत 9 सेंट प्रति जीबी तक लाई, जिससे 52.5 करोड़ से अधिक यूजर्स तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंची। अब अगला लक्ष्य “सबसे कम लागत पर टोकन-पर-वॉट” डिलीवर करना है, यानी किफायती दरों पर बड़े पैमाने पर इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना।
उन्होंने ‘AI कमांड आर्किटेक्चरल फ्रेमवर्क’ का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य का नेटवर्क अलग-अलग टूल्स का जोड़ नहीं होगा, बल्कि एक एकीकृत आर्किटेक्चर होगा, जहां AI और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर मिलकर रियल टाइम में निर्णय लेने और कार्रवाई करने वाले सिस्टम तैयार करेंगे।
ओमेन के अनुसार, टेक्नोलॉजी लीडरशिप ही आगे चलकर इकोनॉमिक और नेशनल लीडरशिप तय करेगी। ऊर्जा, परिवहन, वित्त और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में इंटेलिजेंस एम्बेड करना अनिवार्य होगा, और इसकी बुनियाद टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पर टिकी होगी।
उन्होंने माना कि AI ट्रांसफॉर्मेशन कुछ लोगों में चिंता पैदा कर सकता है, लेकिन इसे “हमारे जीवन का सबसे बड़ा अवसर” बताते हुए कहा कि जो ऑपरेटर्स इस बदलाव को अपनाएंगे, वही भविष्य की अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनेंगे।













