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Thursday, January 15, 2026
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हरिद्वार से बहादुरगढ़ तक पालकी में दादी को लेकर निकले “कलयुग के श्रवण कुमार” पोते विशाल और जतिन

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सावन मास में जहां लाखों शिवभक्त गंगाजल की कांवड़ लेकर हरिद्वार से अपने-अपने गंतव्यों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं हरियाणा के दो पोते विशाल और जतिन ने भक्ति और सेवा की मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी 70 वर्षीय दादी राजबाला को पालकी में बैठाकर कांवड़ यात्रा शुरू की है। खास बात यह है कि पालकी के एक ओर गंगाजल से भरी कांवड़ और दूसरी ओर उनकी दादी मां हैं दोनों का वजन एक समान रखा गया है।

गुरुवार को जब ये दोनों भाई बड़ौत-बुढ़ाना कांवड़ मार्ग पर पहुंचे, तो उन्हें देखकर हर कोई श्रद्धा से नतमस्तक हो गया। झज्जर जिले के बहादुरगढ़ निवासी विशाल और जतिन को लोग “कलयुग के श्रवण कुमार” कहकर बुला रहे हैं। श्रद्धालुओं के बीच इनकी चर्चा हो रही है और जगह-जगह इनका भव्य स्वागत भी किया जा रहा है।

दादी की इच्छा को बनाया संकल्प

विशाल और जतिन ने बताया कि उनकी दादी राजबाला ने पिछले वर्ष कांवड़ यात्रा की इच्छा जताई थी। उस इच्छा को पूरा करने के लिए दोनों भाइयों ने पहले भी दादी के साथ हरिद्वार यात्रा की थी और इस बार यह उनकी दूसरी कांवड़ यात्रा है। वे 21 जून को दादी को लेकर हरिद्वार पहुंचे थे, वहां हर की पैड़ी पर गंगा स्नान कराया और फिर पालकी कांवड़ के साथ यात्रा शुरू की।

दादी बोलीं – गर्व है ऐसे पोते पाए

पालकी में बैठी दादी राजबाला ने कहा, मेरे पोते मुझे कंधों पर बिठाकर इतनी लंबी यात्रा करा रहे हैं, ये मेरे जीवन का सबसे सुखद अनुभव है। जब लोग मेरी संतान की तारीफ करते हैं, तो मेरा मन गर्व से भर जाता है। भगवान ऐसे पोते सबको दे।

दादी ने ही पाला, अब सेवा देना कर्तव्य – पोते विशाल

विशाल ने बताया कि उनके पिता अनिल कुमार अयोध्या में कार्यरत हैं और दादी ने ही बचपन से उनका पालन-पोषण किया। दादी ने हमें इस काबिल बनाया है, अब हमारा धर्म है कि उनकी हर इच्छा पूरी करें, विशाल ने कहा। वह कपड़ों का व्यवसाय करते हैं और जतिन के साथ मिलकर हर साल कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेते हैं।

श्रद्धा के साथ सावधानी की भी अपील

विशाल ने कांवड़ यात्रा में शामिल अन्य भक्तों से अपील की है कि कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क किनारे सावधानी से चलें, नशे से दूर रहें, और दूसरों का सम्मान करें। भोलेनाथ अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

दोनों भाइयों ने बताया कि वे 23 जुलाई, शिव चौदस के दिन बहादुरगढ़ पहुंचकर स्थानीय शिवालय में गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे। यह दिन उनकी तपस्या, सेवा और भक्ति की परिणति का प्रतीक होगा।

जहां एक ओर दुनिया आधुनिकता की ओर दौड़ रही है, वहीं विशाल और जतिन जैसे युवा यह दिखा रहे हैं कि संस्कार, सेवा और श्रद्धा अभी भी जीवित हैं। ये दो भाई सिर्फ कांवड़िये नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा हैं जिन्होंने भक्ति में मानवता को भी जोड़ा है।