
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह ट्रेड डील भारत के हितों के बजाय अमेरिका के पक्ष में झुकी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिया, लेकिन बदले में देश के किसानों, छोटे उद्योगों और युवाओं को क्या फायदा मिला, यह साफ नहीं किया गया।
राहुल गांधी ने समझौते से जुड़ी फैक्टशीट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका से आयात होने वाली दालों, सेब और बादाम पर शुल्क में राहत से भारतीय किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विदेशी कृषि उत्पाद सस्ते दामों पर बाजार में आएंगे, तो देश के किसान अपनी फसल कैसे बेच पाएंगे।
उन्होंने 500 बिलियन डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि यह लक्ष्य भारत को महंगी अमेरिकी ऊर्जा और रक्षा उपकरण खरीदने की दिशा में धकेल सकता है, जिससे देश की कमाई बाहर जाएगी।
भारत को बदले में क्या मिला?
राहुल गांधी ने सरकार से सीधे सवाल किए कि क्या इस समझौते में भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए H-1B वीजा नियमों में कोई ढील दी गई है या भारतीय स्टील और एल्युमीनियम पर लगे अमेरिकी टैरिफ हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर इन सवालों का जवाब ‘नहीं’ है, तो इसे बराबरी का सौदा नहीं कहा जा सकता।
पूंजीपतियों को फायदा, जनता को नुकसान का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह डील बड़े पूंजीपतियों और विदेशी कंपनियों के हित में है, जबकि इससे देश के छोटे और मध्यम उद्योगों पर दबाव बढ़ेगा। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नारे पर तंज कसते हुए कहा कि एक ओर सरकार आत्मनिर्भरता की बात करती है और दूसरी ओर विदेशी कृषि उत्पादों के लिए रास्ता खोल रही है।
भाजपा का जवाब
राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी का कहना है कि यह ट्रेड डील भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका दिलाने के लिए जरूरी है और इससे निर्यात बढ़ाने के नए अवसर खुलेंगे।













