
केंद्र सरकार संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के अपने वादे को जल्द जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार अब इस प्रावधान को लागू करने के लिए नई जनगणना और परिसीमन का इंतजार नहीं करना चाहती।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर इसे जनगणना और परिसीमन की शर्तों से अलग करने पर विचार कर रही है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में ही संशोधन विधेयक लाया जा सकता है।
अमित शाह ने संभाला मोर्चा
इस अहम पहल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद सक्रिय हो गए हैं। सोमवार को उन्होंने संसद भवन में कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में एनसीपी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी), बीजेडी और वाईएसआरसीपी के नेता शामिल हुए। हालांकि अभी कांग्रेस और टीएमसी के साथ चर्चा नहीं हुई है। सरकार अलग-अलग समूहों में विपक्ष से बातचीत कर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
क्या हो सकता है नया फॉर्मूला?
- 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा सकता है
- लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है
- कुल सीटों में 33% महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी
संभावित योजना के तहत लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर 816 हो सकती हैं, जिनमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
विपक्ष का रुख
विपक्षी दलों ने अभी खुलकर विरोध नहीं किया है। एक विपक्षी नेता के मुताबिक, अगर सरकार चुनाव से पहले यह बिल लाती है, तो इसका विरोध करना किसी भी दल के लिए राजनीतिक रूप से आसान नहीं होगा।
2023 में पास हुआ था कानून
गौरतलब है कि संसद ने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित किया था। इसमें संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए नई जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई थी। अब सरकार इस प्रक्रिया को तेज करते हुए महिलाओं को जल्द से जल्द राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।













