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Saturday, March 7, 2026
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अब कोई एक देश नहीं कर सकता दुनिया पर राज — होबार्ट सम्मेलन में एस. जयशंकर का बड़ा बयान

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दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक शक्ति संतुलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट में आयोजित ‘रायसीना डाउन अंडर’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में अब कोई भी एक देश खुद को दुनिया की सर्वोच्च ताकत नहीं कह सकता। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंच पर अमेरिका और चीन के बीच वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है।

अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि दुनिया अब उस दौर से काफी आगे निकल चुकी है जब एक या दो देश पूरी दुनिया के फैसले तय करते थे। आज वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और तकनीक, अर्थव्यवस्था तथा रणनीतिक क्षमता के क्षेत्र में कई नए देश उभरकर सामने आए हैं। ऐसे में विश्व अब एक बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां कई शक्तियां मिलकर वैश्विक संतुलन बनाएंगी।

उन्होंने संकेत दिया कि किसी एक देश का प्रभुत्व कायम रखने की कोशिशें अब पहले जैसी सफल नहीं होंगी। जयशंकर के अनुसार बदलते वैश्विक समीकरणों के कारण शक्ति का संतुलन कई देशों के बीच बंट चुका है और यही आने वाले समय की नई वास्तविकता है।

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज की दुनिया कितनी परस्पर जुड़ी हुई है। किसी एक क्षेत्र में अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक सप्लाई चेन, ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

जयशंकर ने जोर देते हुए कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं निकल सकता। उन्होंने कूटनीति और संवाद को ही अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने का सबसे प्रभावी रास्ता बताया।

इस दौरान उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। जयशंकर ने कहा कि भारत आज विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से उठा रहा है और ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता दे रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के बढ़ते रणनीतिक सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में ‘क्वाड’ जैसे बहुपक्षीय मंच अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनके अनुसार भारत आज ऐसी जिम्मेदार शक्ति के रूप में उभर रहा है जो वैश्विक तनाव के बीच संवाद और सहयोग का पुल बनने की कोशिश कर रहा है।