
भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से जारी कूटनीतिक तनाव के बाद आज का दिन द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम साबित हो सकता है। कनाडा के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर राजधानी पहुंचे हैं। आज वे दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की शिखर वार्ता करेंगे।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई कड़वाहट के बाद यह किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली बड़ी भारत यात्रा मानी जा रही है। विशेषज्ञ इसे संबंधों में ‘डिप्लोमैटिक थॉ’ यानी जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
वार्ता का फोकस: व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा
आज की बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा और संभावित समझौतों की उम्मीद है—
1. आर्थिक साझेदारी (CEPA): लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ा ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता’ (CEPA) फिर से पटरी पर लाया जा सकता है। अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और निवेश को नई रफ्तार मिलेगी।
2. ऊर्जा और यूरेनियम आपूर्ति: भारत के बढ़ते परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को देखते हुए कनाडा से यूरेनियम की स्थिर और दीर्घकालिक आपूर्ति पर सहमति बन सकती है। इससे ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को मजबूती मिलेगी।
3. सुरक्षा और आतंकवाद पर सहयोग: आतंकवाद, कट्टरपंथ और संगठित अपराध के खिलाफ साझा तंत्र विकसित करने पर जोर रहेगा। भारत की ओर से अलगाववादी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा सकता है।
4. छात्र और आव्रजन: कनाडा में बड़ी संख्या में रह रहे भारतीय छात्रों और प्रवासियों के हितों की सुरक्षा, वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने और शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा संभावित है।
‘कार्नी फैक्टर’ क्यों अहम?
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का आर्थिक और बैंकिंग पृष्ठभूमि वाला अनुभव इस दौरे को खास बनाता है। जानकारों का मानना है कि वे भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के उभरते केंद्र के रूप में देखते हैं और व्यापारिक रिश्तों को राजनीतिक विवादों से अलग रखने की रणनीति अपना सकते हैं। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सामरिक सहयोग पर भी दोनों देशों के बीच नई समझ विकसित हो सकती है।
क्या बदलेगा समीकरण?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि विश्वास बहाली की प्रक्रिया की शुरुआत हो सकता है। अगर आज की वार्ता सकारात्मक रहती है तो आने वाले समय में भारत–कनाडा संबंध फिर से रणनीतिक साझेदारी की राह पर लौट सकते हैं। अब निगाहें हैदराबाद हाउस में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं, जहां दोनों देशों के रिश्तों की नई दिशा तय हो सकती है।













