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Tuesday, January 20, 2026
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चिनाब पर भारत की जलविद्युत परियोजनाओं से पाकिस्तान में बेचैनी, पाकिस्तानी सांसद ने संसद में कहा– ‘वाटर वॉरफेयर’

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जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर भारत द्वारा शुरू की गई नई जलविद्युत परियोजनाओं ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पाकिस्तानी संसद में एक महिला सांसद ने भारत पर तीखा हमला बोलते हुए इन परियोजनाओं को ‘वाटर वॉरफेयर’ यानी जल युद्ध करार दिया है। सांसद का आरोप है कि भारत पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना चाहता है।

पाकिस्तानी संसद में ‘तिलमिलाहट’

संसद में चर्चा के दौरान पाकिस्तानी सांसद ने भारत पर 1960 की सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भारत चिनाब नदी पर बांध बनाकर पानी के बहाव को नियंत्रित करना चाहता है, ताकि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोका जा सके।

सांसद ने चेतावनी दी कि यदि चिनाब नदी का जल प्रवाह प्रभावित हुआ, तो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की कृषि व्यवस्था चरमरा सकती है और उपजाऊ भूमि बंजर होने की कगार पर पहुंच सकती है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुद्दा उठाने की मांग

पाकिस्तानी सांसद ने अपनी सरकार से अपील की कि इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों और सिंधु जल आयोग (Indus Water Commission) में आक्रामक तरीके से उठाया जाए, ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके।

भारत का स्पष्ट रुख: संधि के दायरे में परियोजनाएं

भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि चिनाब नदी पर बनाई जा रही सभी जलविद्युत परियोजनाएं सिंधु जल संधि के प्रावधानों के पूरी तरह अनुरूप हैं। विदेश मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय का कहना है कि ये सभी परियोजनाएं ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ तकनीक पर आधारित हैं, जिनमें पानी को रोका नहीं जाता, बल्कि प्राकृतिक बहाव का उपयोग कर बिजली उत्पादन किया जाता है। किरू, रतले और क्वार जैसी परियोजनाओं को भारत अपने विकास और ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए जरूरी बता रहा है।

संधि के तहत भारत को अधिकार

1960 की सिंधु जल संधि के तहत भारत को पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब—पर सीमित उपयोग की अनुमति है, जिसमें बिजली उत्पादन और कुछ सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। वहीं पूर्वी नदियों—रावी, ब्यास और सतलुज—पर भारत को पूर्ण अधिकार प्राप्त है।

बढ़ता राजनीतिक तनाव

हाल के महीनों में भारत ने सिंधु जल संधि में संशोधन को लेकर पाकिस्तान को औपचारिक नोटिस भी भेजा है। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान तकनीकी मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर बार-बार अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की मांग करता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का विरोध तकनीकी कम और राजनीतिक ज्यादा है, जिसका उद्देश्य घरेलू राजनीतिक दबाव और आंतरिक समस्याओं से जनता का ध्यान हटाना है।