
भारतीय सेना ने एक बार फिर दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया है। सेना के एक विशेष पर्वतारोहण अभियान को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है। इस ऐतिहासिक मिशन का नेतृत्व अनुभवी सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज जोशी ने किया। यह उपलब्धि भारतीय सेना के साहस, अनुशासन और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की वैश्विक पहचान बन गई है।
क्या रहा रिकॉर्ड का आधार
यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड सामान्य एवरेस्ट फतह से अलग और खास रहा। रिकॉर्ड एक ही सैन्य अभियान के तहत सबसे बड़ी टीम द्वारा माउंट एवरेस्ट की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचने और सुरक्षित वापसी के लिए दिया गया है। बेहद खराब मौसम, ऑक्सीजन की भारी कमी और ‘डेथ जोन’ जैसी जानलेवा परिस्थितियों के बावजूद पूरे दल ने मिशन को बिना किसी बड़े हादसे के अंजाम दिया।
कर्नल मनोज जोशी का नेतृत्व बना सफलता की कुंजी
इस अभियान की सफलता में लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज जोशी का नेतृत्व निर्णायक साबित हुआ। उनके मार्गदर्शन में टीम को लद्दाख और सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में महीनों तक कठोर प्रशिक्षण दिया गया था। एवरेस्ट पर बदलते मौसम और चुनौतीपूर्ण हालात के बीच सही समय पर शिखर की ओर बढ़ने का निर्णय और टीम का मनोबल बनाए रखना उनके अनुभव का प्रमाण रहा।
तकनीक, अनुशासन और टीमवर्क का शानदार उदाहरण
अभियान के दौरान टीम ने संचार, सुरक्षा और समन्वय के ऐसे मानक स्थापित किए जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। सेना के विभिन्न अंगों से आए जवानों ने एक टीम की तरह काम करते हुए हर चुनौती का सामना किया और ‘सेवा परमो धर्मः’ के आदर्श को साकार किया।
सेना मुख्यालय में खुशी का माहौल
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र मिलने के बाद सेना मुख्यालय में हर्ष का माहौल है। सेना प्रमुख ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश के युवाओं और भावी पर्वतारोहियों के लिए प्रेरणा बनेगी। इस रिकॉर्ड के साथ ही वैश्विक पर्वतारोहण समुदाय में भारतीय सेना की ट्रेनिंग और क्षमताओं की साख और मजबूत हुई है।













