
भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल के तहत विदेश सचिव विक्रम मिसरी 8 अप्रैल 2026 से तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर अमेरिका जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 10 अप्रैल तक चलने वाली इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करना और साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।
रक्षा, व्यापार और तकनीक पर जोर
वॉशिंगटन में अपने प्रवास के दौरान विदेश सचिव वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान रक्षा सहयोग, साझा सैन्य अभ्यास और स्वदेशी तकनीक के आदान-प्रदान पर विशेष चर्चा होगी।
इसके साथ ही फरवरी 2026 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की यात्रा के बाद प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ेगी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर रहेगा।
पश्चिम एशिया संकट पर विशेष मंथन
मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर विशेष चर्चा इस यात्रा का अहम हिस्सा होगी। भारत के लिए पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है, क्योंकि वहां करीब 90 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं और यही क्षेत्र देश की ऊर्जा जरूरतों का मुख्य स्रोत भी है। ऐसे में भारत इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान और मानवीय हितों की सुरक्षा पर जोर देगा।
वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा
इस दौरे में केवल द्विपक्षीय मुद्दे ही नहीं, बल्कि यूक्रेन संकट, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और आतंकवाद जैसे वैश्विक विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। विदेश सचिव की यह यात्रा हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठकों की कड़ी मानी जा रही है, जो भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत हो रहे संबंधों को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी और वैश्विक स्तर पर सहयोग का दायरा और व्यापक होगा।













