
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए वैश्विक बाजार के नए रास्ते खुल गए हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समझौते का सबसे अधिक लाभ उन छोटे उद्यमियों को मिलेगा, जो अब तक ऊंचे आयात शुल्क और जटिल नियमों के कारण यूरोपीय बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे थे।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता भारत के निर्यात को आने वाले वर्षों में दोगुना करने की क्षमता रखता है और कई औद्योगिक क्षेत्रों व राज्यों की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।
MSME सेक्टर को मिलेगा सीधा लाभ
भारत के कुल निर्यात में MSME का योगदान करीब 45 प्रतिशत है। FTA के तहत यूरोपीय संघ के 27 देशों में भारतीय उत्पादों को शून्य सीमा शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय सामान की कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी और निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा। साथ ही, यूरोपीय तकनीक और गुणवत्ता मानकों को अपनाने के लिए भारतीय MSMEs को तकनीकी सहयोग भी मिलेगा।
इन 6 उद्योगों में आएगा बड़ा उछाल
FTA के बाद जिन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है, उनमें टेक्सटाइल और गारमेंट्स, चमड़ा उद्योग, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद और इंजीनियरिंग गुड्स शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में निर्यात में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
इन राज्यों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और पंजाब जैसे राज्यों को इस समझौते से सीधा लाभ मिलेगा। इन राज्यों के पारंपरिक उद्योग और निर्यात क्लस्टर यूरोपीय बाजार में मजबूत पहचान बना सकेंगे।
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, यह समझौता भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम कदम है। यूरोपीय कंपनियां ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के तहत भारत में निवेश बढ़ा सकती हैं। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में करीब 30 लाख नए रोजगार सृजित हो सकते हैं।
हालांकि, यूरोपीय बाजार के सख्त पर्यावरण और श्रम मानकों को पूरा करना भारतीय MSMEs के लिए चुनौती बन सकता है। सरकार ने इसके लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता योजनाएं शुरू करने की बात कही है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता छोटे उद्यमियों के लिए ऐतिहासिक अवसर है और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भारतीय MSMEs वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार हों।












