
भारत और ब्राजील के कूटनीतिक संबंधों ने नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान एक नया अध्याय जोड़ दिया। भारत की पारंपरिक, भव्य और आत्मीय मेजबानी से ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लुला डी सिल्वा भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि भारत के गर्मजोशी भरे स्वागत ने दोनों देशों के रिश्तों में “नई गर्माहट” भर दी है और आने वाले समय में भारत-ब्राजील केवल व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि तकनीक और वैश्विक नीति-निर्धारण में एक-दूसरे के सबसे भरोसेमंद सहयोगी बनेंगे।
समिट के औपचारिक स्वागत समारोह के बाद राष्ट्रपति लुला ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और आतिथ्य परंपरा की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने ‘अतिथि देवो भव’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मेजबानी केवल प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि दो पुराने मित्रों के बीच स्नेह का प्रतीक है। लुला ने यह भी कहा कि लोकतंत्र, विविधता और विकास की साझा चुनौतियों ने भारत और ब्राजील को स्वाभाविक साझेदार बनाया है।
वार्ता के दौरान भावनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ ठोस भविष्य के रोडमैप पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने डिजिटल कॉरिडोर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मिलकर काम करने का संकल्प लिया। भारत अपनी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमताओं को ब्राजील के साथ साझा करेगा, जिससे कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में तकनीकी बदलाव को गति मिलेगी। ऊर्जा सुरक्षा पर भी विशेष जोर रहा, जहां बायोफ्यूल में ब्राजील की विशेषज्ञता और भारत की बढ़ती जरूरतों को जोड़ते हुए ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस’ को नई मजबूती देने पर सहमति बनी।
रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग को नया आयाम मिला है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ब्राजीली रक्षा कंपनियों के भारत में निवेश और संयुक्त निर्माण की संभावनाओं पर सकारात्मक बातचीत हुई, जिससे दोनों देशों की रक्षा क्षमताएं मजबूत होंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति लुला ने ‘ग्लोबल साउथ’ की साझा आवाज को और बुलंद करने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता दोहराते हुए स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे के दावों का समर्थन किया। साथ ही, आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग पर चर्चा कर डॉलर निर्भरता कम करने की दिशा में भी अहम संकेत दिए।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली समिट ने भारत-ब्राजील संबंधों को भावनात्मक निकटता से आगे बढ़ाकर रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव पर खड़ा कर दिया है, जिसका असर आने वाले वर्षों में वैश्विक मंचों पर साफ दिखाई देगा।













