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Saturday, January 17, 2026
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घूस लेने के मामले में ये राज्य है सबसे आगे, जानें दिल्ली कितने नम्बर पर

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ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल और लोकल सर्कल्स द्वारा कराए गए ऑनलाइन सर्वेक्षण में पाया गया कि संपत्ति पंजीकरण, पुलिस और नगरपालिका निगम देश की सबसे भ्रष्ट संस्थाएं हैं। सर्वे के मुताबिक 2018 में 56 फीसद लोगों को सरकारी कार्यालयों में काम कराने के लिए घूस देनी पड़ी। 2017 में यह आंकड़ा 45 फीसद था। यानी कि एक साल में घूस देने के मामले में 11 फीसद की रिकार्ड वृद्धि हुई है। भारत के 215 जिलों में पचास हजार नागरिकों द्वारा दी गईं 1.60 लाख से अधिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर यह सर्वेक्षण किया गया है। इसमें 33 फीसद महिलाओं की और 67 फीसद पुरुषों की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं। 45 फीसद लोग मेट्रो शहरों से, 34 फीसद द्वितीय श्रेणी के शहर से और फीसद तृतीय श्रेणी के शहरों से शामिल किए गए हैं।

79 फीसद लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले बाबू सबसे ज्यादा भ्रष्ट हैं। उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब में यह आंकड़ा 56फीसद और मध्य प्रदेश में 50 फीसद रहा। राजधानी दिल्ली भी नहीं है पीछे सर्वे के मुताबिक 46 फीसद लोगों का कहना है कि उन्हें पिछले एक साल में दिल्ली के सरकारी कार्यालयों में काम कराने के लिए घूस देनी पड़ी।

भारत भ्रष्टाचार सर्वेक्षण 2018 नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि 91 फीसद लोगों को पता नहीं है कि उनकी राज्य सरकारों के पास भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन नंबर है। वहीं 82 फीसद लोगों का कहना है कि उनके स्थानीय प्रशासन या राज्य सरकार ने पिछले एक साल में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया है। इससे पता चलता है कि राज्य सरकारें भ्रष्टाचार विरोधी जागरूकता कार्यक्रम में विफल रही हैं। सरकारों ने भ्रष्टाचार से लड़ने और जागरुकता पैदा करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए हैं।

संसद ने भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधन) अधिनियम 2018 पारित किया है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर सात साल की जेल की सजा का प्रावधान है। यह कानून घूस लेने और देने वाले दोनों को दोषी ठहराता है। मध्यप्रदेश की मतदाता सूची मे गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और चुनाव आयोग ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट से कार्रवाई की मांग की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों और दस फीसद वीवीपैट मतों का ईवीएम से मिलान कराए जाने की कमलनाथ की मांग पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

 

 

 

 

 

 

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