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Friday, January 16, 2026
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5जी अफवाहों अदालत में जूही पर जुर्माना, गांवों में मोबाइल टावर बंद कराने वाले चढ़ूनी पर कार्यवाही करेगी हरियाणा सरकार ?

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5जी अफवाह केंद्र के बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट में भी साफ हो चुकी है, लेकिन हरियाणा में अफवाहें अब गांव-गां वका हिस्सा बन चुकी हैं। क्या हरियाणा सरकार सख्त हार्यवाही करेगी, या मनोहारी आदेश ही रिलीज ही भेजेगी ?

5जी की अफवाहों के मामले में जूही चावला ने पंछियों के मरने और इंसानों के बीमार होने वाले वही लॉजिक दिए थे, जिसे हरियाणा में गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बहुत दिनों तक गांव-गांव, घूम-घूमकर इस हद तक प्रचारित प्रसारित करवा दिया कि रोहतक, जींद और हिसार समेत कई जिलों में भ्रमवश गांव वालों ने मोबाइल टावर ही बंद करवा दिए।

जूही चावला के 5जी रेडिएशन के आरपों को निराधार और बेतुका बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने जूही चावला पर 20 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है और ये भी कहा है कि ये महज एक पब्लिसिटी स्टंट था।

लेकिन सवाल ये है  जो वीडियो किसान आंदोलन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी के द्वारा बनाकर पूरे हरियाणा में प्रचारित प्रसारित करवाया गया, उसपर आज तक क्या हुआ?

चढ़ूनी के दावे के मुताबिक टिटौली गांव के पास बनाए गया ये वीडियो को लगभग 2 लाख 80 हजार लोगों ने देखा और 12 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया है।

इस वीडियो को एक नहीं बल्की हरियाणा में सैंकड़ों वेब न्यूज पोर्टल्स पर अपलोड किया गया है और वहां भी इस वीडियो के व्यूज लाखों में हैं।

इस वीडियो के फैलने की वजह से जब पूरे हरियाणा में बवाल होने लगा तो COAI की अर्जी के बाद हरियाणा सरकार ने मोबाइल टावर को अफवाह बताते हए कार्यवाही के दावे तो किए, लेकिन अभी तक इस बारे में कोई कार्यवाही हुई है, ऐसी कोई खबर देखने को नहीं मिलती।

ऐसे में हरियाणा सरकार की कार्यक्षमता पर सवाल भी उठते हैं और अब दिल्ली हाईकोर्ट के 5जी मामले में PIL के बाद उम्मीद भी जगती है कि हरियाणा सरकार जनता को अफवाहों में फंसाने वाले गुरनाम सिंह चढ़ूनी जैसे नेताओं पर कार्यवाही करेगी।

मनोहर लाल खट्टर सरकार से उम्मीदें जनता को बहुत हैं, लेकिन जिस तरह से हिसार हिंसा में दर्जनों पुलिसकर्मियों के घायल होने के बावजूद हिसार प्रशासन द्वारा टिकैत और गुरनाम सिंह चढ़ूनी से बातचीत के बाद सभी केस वापस लेने की बात सामने आई, उससे राजनीतिक मंशा पर सवाल उठने लाजमी हैं।

देखना ये है कि क्या मनोहर सरकार राजनीतिक प्रचार के लिए अफवाहों और हिंसा का रास्ता इख्तियार करने वाले नेताओं पर कोई सख्त कार्यवाही करती है या फिर वो सिर्फ मनोहारी बातें ही करेगी।