
राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में आज गणगौर का पावन पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है।
शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन यह व्रत रखा जाता है, जो इस वर्ष 21 मार्च 2026, शनिवार को पड़ रहा है।
- सूर्योदय: सुबह 06:24
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:52
- सायं संध्या: शाम 06:32 से 07:43
पूजा विधि
सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद घर के मंदिर में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गण और गौरी की प्रतिमा स्थापित करें।
व्रत का संकल्प लेकर देवी-देवताओं को चंदन, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर विधि-विधान से पूजा करें और आरती के बाद लोकगीत गाते हुए शोभायात्रा भी निकाली जाती है।
शाम के समय पुनः पूजा कर व्रत कथा सुनी जाती है और अंत में प्रतिमा का विसर्जन कर व्रत खोला जाता है।
पूजा के मंत्र
- ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः॥
- जय जय गिरिराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी॥
- कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के उद्देश्य से दी गई है।













