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Tuesday, January 20, 2026
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CBSE में बड़ा बदलाव, अब रटने पर नहीं, समझ और स्किल पर होगा फोकस

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) अब छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार करने जा रहा है। नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत बोर्ड एक नया ऑनलाइन मूल्यांकन प्लेटफॉर्म शुरू करने की तैयारी में है, जिसके माध्यम से यह आकलन किया जाएगा कि छात्र न केवल विषयों को कितना समझते हैं, बल्कि उस ज्ञान को वास्तविक जीवन में कैसे लागू करते हैं।

इस पहल का उद्देश्य छात्रों को रटने की आदत से बाहर निकालकर उन्हें 21वीं सदी की आवश्यक स्किल्स और व्यावहारिक ज्ञान से लैस करना है।

 परीक्षा अब डर नहीं, सीखने का हिस्सा होगी

CBSE की नई योजना के अनुसार अब परीक्षा को डराने वाला आखिरी चरण नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जाएगा। बोर्ड एक ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है जिसके जरिए कक्षा 3, 5 और 8 के छात्रों की विशेष परीक्षा ली जाएगी। इस परीक्षा को SAFAL (Structured Assessment for Analysing Learning) कहा जाएगा।

SAFAL का उद्देश्य

SAFAL परीक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों की —

  • बुनियादी समझ (Conceptual Understanding)
  • तर्क शक्ति (Reasoning Ability)
  • सोचने की क्षमता (Critical Thinking) का आकलन करना है।

इसके माध्यम से स्कूलों को यह पता चलेगा कि कौन-से विषयों में छात्रों को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके।

 विज्ञान, गणित और अंग्रेजी पर विशेष ध्यान

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, परीक्षा का उद्देश्य अब केवल रटने की योग्यता को आंकना नहीं, बल्कि छात्रों की समझ और सीखने की क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए।

इसी दिशा में CBSE ने कक्षा 6 से 10 तक के लिए Competency-Based Assessment Framework लागू किया है। इस ढांचे में छात्रों की — सोचने, समझने और समस्या समाधान की क्षमता, वास्तविक जीवन से जुड़ी सीखने की योग्यता पर विशेष जोर दिया गया है।

इसमें खास तौर पर विज्ञान, गणित और अंग्रेजी विषयों को अधिक महत्व दिया गया है ताकि बच्चे विषयों को गहराई से और व्यावहारिक रूप से समझ सकें।

शिक्षा में बदलाव की नई दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को आधुनिक और प्रासंगिक बनाएगा। इससे न केवल बच्चों का कॉन्सेप्ट क्लियर होगा, बल्कि वे रोज़मर्रा की समस्याओं को तार्किक रूप से हल करने में भी सक्षम बनेंगे।

CBSE की यह नई पहल भारतीय शिक्षा प्रणाली को मेमोराइजेशन से एनालिटिकल लर्निंग की ओर ले जाने वाला ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।