
लोकसभा की कार्यवाही में पारदर्शिता और सांसदों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए उपस्थिति के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत अब सांसदों की हाजिरी तभी दर्ज होगी, जब वे सदन के भीतर अपनी निर्धारित सीट पर बैठे होंगे। यदि कोई सांसद कार्यवाही के दौरान हॉल, गलियारे या लॉबी में मौजूद रहता है, तो उसे अनुपस्थित माना जाएगा। लोकसभा सचिवालय ने इस नई बायोमेट्रिक और सेंसर आधारित व्यवस्था को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है।
कैसे काम करेगी नई हाई-टेक व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत लोकसभा में सांसदों की सीटों पर सेंसर लगाए गए हैं। जैसे ही सांसद अपनी सीट पर बैठेंगे, सिस्टम अपने आप उनकी उपस्थिति दर्ज कर लेगा। हाजिरी को और पुख्ता बनाने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक, जैसे फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन, को भी इससे जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही लॉबी और गैलरी को ‘नो-अटेंडेंस जोन’ घोषित किया गया है, यानी वहां बिताया गया समय उपस्थिति में नहीं गिना जाएगा।
क्यों जरूरी हुआ नियमों में बदलाव
लोकसभा सचिवालय के अनुसार कई बार देखा गया है कि महत्वपूर्ण विधेयकों और चर्चाओं के दौरान सदन में सांसदों की संख्या कम रहती है। नए नियम से सांसदों को चर्चा के समय सदन में अपनी सीट पर मौजूद रहना होगा। साथ ही सांसदों को मिलने वाले भत्ते भी उनकी वास्तविक उपस्थिति के आधार पर तय होंगे, जिससे सरकारी खर्च में पारदर्शिता आएगी। बार-बार सदन से बाहर जाने और लॉबी में जमावड़े जैसी प्रवृत्तियों पर भी रोक लगेगी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने
इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सत्ता पक्ष का कहना है कि यह डिजिटल इंडिया की दिशा में एक अहम कदम है और इससे संसदीय कामकाज ज्यादा अनुशासित होगा। वहीं कुछ विपक्षी सांसदों का मानना है कि कई बार जरूरी बातचीत के लिए लॉबी में जाना पड़ता है, ऐसे में उसे अनुपस्थिति मानना व्यावहारिक नहीं है।
लोकसभा का यह नया नियम सांसदों के लिए जिम्मेदारी और चुनौती दोनों है। अब सिर्फ हाजिरी लगाकर गायब होना संभव नहीं होगा, बल्कि सीट पर मौजूद रहकर कार्यवाही में भाग लेना ही उनकी सक्रियता का प्रमाण माना जाएगा। आने वाले सत्रों में इसका असर सदन की उपस्थिति और कार्यकुशलता पर साफ दिखाई दे सकता है।













