
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब अपने अगले बड़े मिशन चंद्रयान-4 की तैयारियों में जुट गया है। इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास इस मिशन के लिए लैंडिंग साइट का चयन कर लिया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रयान-4 चंद्रमा के विशाल पहाड़ मोंस म्यूटोन के पास उतरेगा।
चंद्रयान-4 भारत का पहला ऐसा मिशन होगा, जिसमें चंद्रमा की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र कर उन्हें सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लाया जाएगा। यह मिशन तकनीकी रूप से काफी जटिल माना जा रहा है।
इसरो ने मोंस म्यूटोन क्षेत्र को इसलिए चुना है क्योंकि वहां पानी की बर्फ मौजूद होने की संभावना है। इसके अलावा इस इलाके में लंबे समय तक सूर्य की रोशनी रहती है, जो यान के सौर पैनलों के लिए जरूरी है। आसपास मौजूद गहरे और स्थायी अंधेरे गड्ढों में महत्वपूर्ण खनिजों के अवशेष मिलने की उम्मीद है।
मिशन की सफलता से भारत चंद्रमा से सैंपल वापस लाने वाला दुनिया का चौथा देश बन सकता है। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। चंद्रयान-4 मिशन भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।













