
बुंदेलखंड के महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध सप्तम कन्या विवाह महोत्सव में आज आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। करीब 200 एकड़ में फैला आयोजन स्थल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।

इस भव्य आयोजन का नेतृत्व एवं मार्गदर्शन धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर सरकार) द्वारा किया गया। पूज्य सरकार ने इस अवसर पर कहा कि यह महोत्सव केवल विवाह का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कारों, सेवा भाव और बेटी सम्मान का विराट संकल्प है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयोजन में लगभग 15 लाख लोगों की ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज की गई। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और समाजसेवियों ने विवाह सूत्र में बंधने वाली बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर 300 कन्याओं का विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। हजारों लोगों की मौजूदगी में यह आयोजन ऐतिहासिक बन गया। देश-विदेश से आए संतों की पावन उपस्थिति और विदेश से पधारे राजदूतों के आगमन ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
आयोजकों के अनुसार, भारत के इतिहास में पहली बार किसी सामाजिक आयोजन में इतनी विशाल संख्या में लोगों की एक साथ भागीदारी देखने को मिली। हर ओर उत्साह, उल्लास और सामाजिक एकता का वातावरण रहा।
बुंदेलखंड का यह महाकुंभ सेवा, संस्कृति, एकता और मानवता का अनुपम संगम बनकर उभरा। यह महोत्सव न केवल सामूहिक विवाह की परंपरा को सशक्त करता है, बल्कि समाज में बेटी बचाओ–बेटी बढ़ाओ जैसे संदेशों को भी नई ऊर्जा देता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।
आयोजकों के मुताबिक, भारत के इतिहास में पहली बार किसी सामाजिक आयोजन में इतनी विशाल संख्या में लोगों की एक साथ उपस्थिति दर्ज की गई है। हर ओर उत्साह, उल्लास और सामाजिक समरसता का माहौल देखने को मिला, जिसने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह महोत्सव न केवल सामूहिक विवाह की परंपरा को मजबूती देता है, बल्कि समाज में बेटी बचाओ–बेटी बढ़ाओ जैसे संदेशों को भी सशक्त रूप से आगे बढ़ाता है।













