17.6 C
New York
Wednesday, March 11, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
Home भक्ति धर्म तंत्र-मंत्र-यंत्र जानिए ‘मां कालरात्रि’ की उत्पत्ति की पूरी कहानी

जानिए ‘मां कालरात्रि’ की उत्पत्ति की पूरी कहानी

49

मां कालरात्रि’ की उत्पत्ति

मां कालरात्रि‘ की उत्पत्ति
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। 

लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। 

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

कालयात्रि मां की कथा के अनुसार दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था। इससे चिंतित होकर सभी देवतागण शिव जी के पास गए। देवताओं की बात मानते हुए भगवान शिव ने देवी पार्वती से राक्षसों का वध कर भक्तों की रक्षा करने के लिए कहा। मां ने भगवान शिव की बात मानते हुए ‘दुर्गा ‘का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया। परंतु जैसे ही दुर्गा जी ने रक्तबीज को मारा उसके शरीर से निकले रक्त से लाखों रक्तबीज उत्पन्न हो गए। इसे देख दुर्गा जी ने अपने तेज से कालरात्रि को उत्पन्न किया। इसके बाद जब दुर्गा जी ने रक्तबीज को मारा तो उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को कालरात्रि ने अपने मुख में भर लिया और सबका गला काटते हुए रक्तबीज का वध कर दिया।