
बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अब अहम चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की पड़ताल के तहत मंदिर के कुबेर भंडार से जुड़े रिकॉर्ड, पुराने अभिलेखों और आय-व्यय के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां चढ़ावे के लेखा-जोखा और वास्तविक जमा राशि का मिलान कर रही हैं।
जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे का रिकॉर्ड और जमा की गई राशि में किसी प्रकार का अंतर तो नहीं है। इसके लिए कुबेर भंडार से संबंधित रजिस्टरों, लेखा दस्तावेजों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है।
एसआईटी उन कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े रहे हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अनियमितताओं में किसी संगठित तरीके से एक से अधिक लोगों की संलिप्तता तो नहीं थी।
चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम का संचालन श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा किया जाता है। जांच के दायरे में चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया, रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारियों की भी समीक्षा की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कुबेर भंडार के रिकॉर्ड की जांच को इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, क्योंकि इससे चढ़ावे से जुड़े वित्तीय लेन-देन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।











