17.6 C
New York
Thursday, January 22, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
Home news वंशवाद लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा शशि थरूर का बड़ा बयान, बोले...

वंशवाद लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा शशि थरूर का बड़ा बयान, बोले सत्ता किसी परिवार की विरासत नहीं होनी चाहिए

8

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने देश की राजनीति में वंशवाद को लेकर बड़ा बयान देकर सियासी हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि वंशवाद भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है, क्योंकि इससे नई सोच और नेतृत्व के अवसर सीमित हो जाते हैं।

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में थरूर ने कहा, भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में सत्ता किसी व्यक्ति या परिवार की विरासत नहीं होनी चाहिए। राजनीति में लोगों को उनकी क्षमता और कार्य के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए, न कि खानदान के नाम पर। थरूर ने स्पष्ट कहा कि जब दशकों तक एक ही परिवार या वर्ग राजनीतिक रूप से हावी रहता है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ें कमजोर होने लगती हैं।

थरूर ने यह भी स्वीकार किया कि वंशवाद किसी एक दल की समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रवृत्ति लगभग हर राजनीतिक दल में गहराई तक समाई हुई है। उन्होंने कहा, यह समस्या केवल कांग्रेस या किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है। यह पूरे राजनीतिक तंत्र में फैल चुकी है, जो लोकतंत्र के स्वस्थ विकास के लिए चिंताजनक है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, थरूर का यह बयान कांग्रेस के भीतर आत्ममंथन की जरूरत को उजागर करता है और देश में योग्यता आधारित नेतृत्व की मांग को और मजबूत करता है।

बीजेपी ने साधा निशाना

थरूर के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। पार्टी प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा, शशि थरूर ने जो कहा, वह उनके अनुभव पर आधारित सच्चाई है। कांग्रेस पार्टी में दशकों से एक ही परिवार का वर्चस्व रहा है, और थरूर का बयान उसी हकीकत को उजागर करता है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस में आज भी निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ लोगों के परिवारिक घेरे तक सीमित है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शशि थरूर का यह बयान आने वाले समय में कांग्रेस के अंदर नई बहस को जन्म दे सकता है। उनके मुताबिक, यह वक्त है जब कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक मूल्यों को मज़बूत करने और नई पीढ़ी के नेतृत्व को मौका देने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

थरूर का संदेश

अपने वक्तव्य में थरूर ने कहा, लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ तभी साकार होगा जब हर वर्ग और पृष्ठभूमि के लोगों को समान अवसर मिले। सत्ता का आधार योग्यता होनी चाहिए, न कि विरासत। उनके इस बयान ने न केवल कांग्रेस के भीतर आत्मचिंतन की लहर पैदा की है, बल्कि देश की राजनीति में वंशवाद बनाम योग्यता की पुरानी बहस को एक बार फिर जगा दिया है।