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भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है, यह जीवन जीने की कला का मार्ग दर्शन करता है

बरही, गोरखपुर। गोरखपुर के झंगहा क्षेत्र के बरही गांव में उमेश गुप्ता जी के सौजन्य से कई वर्षों से यह भागवत कथा का आयोजन कराया जा रहा है। उसी क्रम में रविवार को भी भागवत कथा की शुरुआत कलश यात्रा से की गयी। कलश यात्रा में हजारों की संख्या में भक्तों का जनसैलाब देखने को मिला। वहॉ के स्थानीय लोगों का कहना है कि तकरीबन 10 हजार से ऊपर की संख्या में भक्तों की भीड़ थी।

गोरखपुर के झंगहा क्षेत्र के बरही गांव में नौ दिवसीय भागवत कथा का आयोजन किया गया है। पहले दिन का कार्यक्रम कलश यात्रा से प्रारम्भ हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तों ने अपनी मौजूदगी दर्ज करायी। आपको बता दें कि बड़े धूमधाम से निकाली गयी कलश यात्रा में महिलाएं, कन्याओं, वृद्धों और पुरूषों ने बढ़-चढकर हिस्सा लिया। ये कलश यात्रा बरही गाँव में स्थित मंदिर कुटिया से निकल कर कोना, सोनबरसा, झंगहा अमहिया होते हुए राप्ती नदी पहुंचा। जहां राप्ती नदी से 1800 सौ कलशों में पानी भरा गया।

1800 सौ कलशों को लेकर लेकर फिर वापस उसी बरही गाँव में स्थित कुटिया पर लाया गया। इस बीच भक्तों का जनसैलाब व उत्साह देखने लायक था। वहीं इस मंदिर की मान्यता है कि जो भी सावन में मन से पूजा अर्चना करता है उसकी मनोकामना निश्चित पूरी होती है।

भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है। यह जीवन जीने की कला का मार्ग दर्शन करता है। भागवत की भक्ति का आदर्श कृष्ण की गोपियां हैं। गोपियों ने घर नहीं छोड़ा। उन्होंने स्वधर्म त्याग नहीं किया। वे वन में नहीं गई फिर भी वह श्री भगवान को प्राप्त कर सकीं। भागवत ज्ञान, वैराग्य को जागृत करने की कथा है। ज्ञान और वैराग्य मनुष्य के अंदर है, पर वह सोए हुए हैं। भागवत के अलावा अन्य कोई ग्रंथ नहीं जो मनुष्य मात्र को सात दिनों में मुक्ति का मार्ग दिखा दे। इससे पूर्व मंगलाचारण के साथ व्यास पीठ को पूजन-अर्चन किया गया।