आखिर धनतेरस के दिन ही क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस?

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हर साल भगवान धन्वंतरि की जयंती पर ही देशभर में धूमधाम से राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है। पूरानी मान्याताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि ने ही अमृतमय औषधियों की खोज की थी। इसलिए इनके जन्मदिन या कहे धन्वंतरि जयंती पर ही देशभर में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन देशभर में आयुर्वेद से जुड़ी शख्सियतों और संगठनों को इस क्षेत्र में आए नए अवसरों के बारे में जागरुक किया जाता है।

2016 में मनाया गया था पहला आयुर्वेद दिवस !

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पहली बार 2016 में आयुष मंत्रालय द्वारा मनाया गया। इस दिन आयुष मंत्रालय द्वारा देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से भारत सरकार आयुर्वेद के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों और संगठनों को इस क्षेत्र में आए नए अवसरों के बारे में जागरुक करती है। साथ ही आयुर्वेद से जुड़े लोगों और संगठनों को नए अवसर भी प्रदान करती है।
भगवान धन्वंतरि की उपत्ति का रहस्य !
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार धन्वंतरि भगवान विष्णु जी के अवतार हैं। भगवान धन्वंतरि की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। उनकी उत्पत्ति के समय उनके हाथ में चांदी का कलश था। इसलिए भगवान धन्वंतरि जयंती या कहे इनके जन्मदिन (धनतेरस) पर चांदी का खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन चांदी की खरीदारी करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है।

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