Mother Teresa Special: अगनेस गोंझा से लेकर मदर टेरेसा बनने तक की पूरी कहानी

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मदर टेरेसा, वह नाम जिसकी शुरुआत में ही मदर है यानी ‘मां’। मदर टेरेसा जिन्हें देश का बच्चा-बच्चा जानता है, अगर इनके बारे में ज्यादा जानता नहीं भी तो पहचानता जरुर है। मदर टेरेसा अपने काम और निष्पक्ष सेवा की वजह से लाखों मासूम की ‘मां’ बनी। मदर टेरेसा मानती थी कि ‘प्यार की भूख रोटी की भूख से कहीं बड़ी है’। इसलिए बीमारियों का इलाज केवल दवाइयों में नहीं बल्कि आस-पास के वातावरण और लोगों से होता है। मदर टेरेसा का वास्तविक नाम ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ था। उन्हें भारत की नागरिकता सन् 1948 में मिली।

बचपन में ही इनके पिता की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद इनकी मां ने ही इन्हें पाला और बेहतर से बेहतर शिक्षा दी। बता दें इन्हें वेटिकन सिटी में 9 सितम्बर 2016 को पोप फ्रांसिस द्वारा संत की उपाधि प्राप्त हुई।

शिक्षा

मदर टेरेसा स्कूली शिक्षा के बाद अंग्रेजी सिखने के लिए आयरलैंड आई क्योंकि उन्होंने 18 साल की उम्र में ही ‘सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’ में शामिल होने का निर्णय ले लिया था और ‘लोरेटो’ की सिस्टर्स अंग्रेजी भाषा में ही बच्चों को पढ़ाया करती थी।

पुरस्कार

मदर टेरेसा को उनकी निष्पक्ष सेवाओं के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें 1979 में पोपजान तेइसवें के ‘Nobel Peace Prize’ से और धर्म की प्रगति के टेम्पेलटन फाउण्डेशन पुरस्कार से नवाजा गया था।

1962 में Padma Shri,

1969 में Jawaharlal Nehru Award for International Understanding,

1971- Pope John XXIII Peace Prize से

1985 में Presidential Medal of Freedom,

1994- Golden Honour of the Nation और ना जाने कितने पुरस्कारों और सम्मानों पर सुनहरे अक्षरों से इनका नाम लिखा है।

भारत रत्न

इतना ही नहीं राष्ट्र के प्रति निष्पक्ष सेवा के लिए इन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी नवाजा गया।

निधन

5 सितंबर 1997 को दिल का दौरा पड़ने की वजह से इनका निधन हो गया।