वट सावित्री व्रत करने से होती है सभी मनोकामनाएं पूर्ण, जानें महत्व

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वट सावित्री व्रत

वट पूर्णिमा का व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की सलामती के लिए रखती हैं। इस व्रत को लेकर ऐसी मान्यता है कि जो पत्नी अपने पति के लिए ये व्रत रखती है उसके पति की उम्र लंबी हो जाती है। वट पूर्णिमा का व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन ही शनि जयंती पर पड़ती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने अपने तप की ताकत से यमराज को अपने पति सत्यवान के जीवन को वापस करने के लिए मजबूर किया था। इसलिए विवाहित महिलाएं अपने पति की सलामती और लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं।

इस व्रत से विवाहित महिलाओं को विशेष वरदान मिलता है। उनके पति देव और संतान की उम्र बढ़ती है। वट सावित्री का व्रत करने से अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्ति मिलती है। प्राचीन काल से ही हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को महत्त्वपूर्ण माना गया है। इसलिए इस व्रत के ज्येष्ठ माह में पड़ने की वजह से इस व्रत का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है।

ऐसा माना जाता है कि ज्येष्ठ माह और खासकर इस पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान कर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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