जानिए, ‘धरती के स्वर्ग’ के ‘मार्तंड सूर्य मन्दिर’ की कहानी।

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सूर्य को समर्पित मार्तंड मंदिर कश्मीर के दक्षिणी भाग में अनंतनाग से पहलगाम के रास्ते में मार्तण्ड नामक स्थान पर है जिसका वर्तमान नाम मट्टन है। मार्तंड सूर्य मन्दिर एक पठार के शिखर पर बना है। करीब 1,700 वर्ष पहले कश्मीर में इस मंदिर का निर्माण सूर्य वंश के राजा ललितादित्य मुक्तापीड ने करवाया था। कहा ये भी जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाराजा अशोक के बेटे जलुका ने 200 बीसी में करवाया था ।
मार्तंड मंदिर का निर्माण भगवान सूर्य की उपासना के लिये करवाया गया था। यह मंदिर अपनी स्थापत्य कला, सुंदरता के लिये मशहूर है।कारकूट वंश के राजा हर्षवर्धन ने ही 200 साल तक सेंट्रल एशिया सहित अरब देशों में राज किया था। पहलगाम का मशहूर शीतल जल वाला चश्मा इसी वंश से संबंधित है।

मार्तंड सूर्य मंदिर का प्रांगण वृहद है वर्तमान में इसके चतुर्दिक लगभग 84 प्रकोष्ठों के अवशेष हैं। इस मंदिर के वास्तुकला की विशेषता इसके मेहराब हैं। मंदिर के स्तंभों और द्वार मंडपों की वास्तु शैली रोम की डोरिक शैली से थोड़ी-थोड़ी मिलती है।

चारों ओर हिमाच्छादित पहाड़ों से घिरे इस मंदिर के निर्माण में वर्गाकार चूना-पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। पश्चिम की ओर मुड़े होने के कारण हिंदू धर्म-ग्रंथों में इसे विशेष महत्व मिला है। मार्तंड सूर्य मंदिर को कश्मीरी वास्तु शैली का अनुपम, किंतु संभवत: एकमात्र उदाहरण माना जाता है।

इस मंदिर का निर्माण मध्यकाल में 7वीं से 8वीं शताब्दी में हुआ था। सूर्य राजवंश के राजा ललितादित्य ने अनंतनाग के पास एक पठारी क्षेत्र में इसका निर्माण करवाया था। मार्तंड सूर्य मंदिर में 84 स्तंभ हैं जो समान अंतराल पर रखे गए हैं, इसे बनाने के लिए चूने के पत्थर की चौकोर ईंटों का उपयोग किया गया है।इसके बारे में एक कहानी प्रसिद्ध है कि यहां सूर्य की पहली किरण निकलने पर राजा इस सूर्य मंदिर में पूजा कर चारों दिशाओं में देवताओं का आह्वान करने के बाद अपनी दिनचर्या आरंभ करते थे। अब खंडहर में तब्‍दील हो चुके इस मंदिर की ऊंचाई मात्र 20 फुट ही रह गई है।
कश्मीर घाटी में बना ऐतिहासिक मार्तण्ड सूर्य मंदिर आजकल अपनी ख़स्ताहाली की मायूस कर देने वाली तस्वीर पेश करता है।मंदिर की दीवारों पर कई देवी देवताओं की मूर्तियां खुदी हैं। रखरखाव न होने से इनमें से अधिकांश जर्जर हो गई हैं।
मंदिर के खम्भे भारी पत्थरों से बने हैं और उनकी ऊंचाई बहुत अधिक न होने के बावजूद वो एक मजबूत किले का हिस्सा जैसे लगते हैं। बॉलीवुड के लिए यह एक ख़ास आकर्षण का केंद्र रहा है. यहां फ़िल्म ‘लव स्टोरी’ से लेकर ‘हैदर’ तक कई फिल्मों को यहाँ फ़िल्माया भी गया है।

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