दीपावली त्यौहार से जुड़ी कथाएं, पूजन के समय उच्चारण होगा फायदेमंद

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दीपावली पांच पर्वों का अनूठा त्योहार होता है। इसके बाद धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और यमद्वितीया जैसे विशेष त्यौहार मनाएं जाते हैं। दीपावली से पहले घर की अच्छे से साफ-सफाई की जाती है.. घर लाइटों से सजाएं जाते हैं। दीपावली से पहले ही बच्चे पटाखे फोड़ना शुरू कर देते हैं और लोग आपस में मिठाइयां बांटते हैं जिसकी वजह से ये त्योहार खुशियों और धन प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन भगवान श्री राम भी चौदह साल का वनवास काटकर अयोध्या वापस लौटे थे। अयोध्या वासियों ने भगवान राम के वापस आने की खुशी में पूरी नगरी को दीयों से सजाया था।

दीपावली को मनाने के पीछे कई कथाएं हैं। जैसे

एक कथा के अनुसार-

प्राचीन काल में एक राजा ने एक लकड़हारे को प्रसन्न होकर चंदन की लकड़ी का जंगल उपहार स्वरुप दे दिया लेकिन लकड़हारा तो ठहरा लकड़हारा, भला उसे चंदन की लकड़ी का महत्व क्या मालूम, काफी दिनों तक वह इन चंदन की लकड़ियां का उपयोग भोजन बनाने के लिए करता रहा।

राजा को जब यह बात पता चली तो, उसकी समझ में आ गया कि धन, पैसे का उपयोग भी बुद्धिमान व्यक्ति ही कर सकता है। यही कारण है कि लक्ष्मी जी और श्री गणेश जी की एक साथ पूजा की जाती है। ताकि व्यक्ति को धन के साथ साथ उसे प्रयोग करने की योग्यता भी प्राप्त हो।

दूसरी कथा-

एक कथा के अनुसार कृष्ण जी ने दीपावली से एक दिन पहले नरकासुर नामक राक्षक का वध किया था। नरकासुर एक दानव था और कृष्ण जी ने पृथ्वी लोक को उसके आतंक से मुक्त किया था। इसी कारण बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रुप में भी दीपावली का पावन पर्व मनाया जाता है।

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